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गोमती उद्गम स्थल के कायाकल्प को 12.26 करोड़ की परियोजना मंजूर
- दैनिक लोक भारती
- 18 Sep, 2026
तीनों झीलों का होगा पुनर्जीवन, 3.23 किमी जल निकासी मार्ग की होगी सफाई; माधोटांडा का गंदा पानी नदी में जाने से रोकने को बनेगा प्राकृतिक एसटीपी
शोएब खान
पीलीभीत। गोमती नदी के उद्गम स्थल माधोटांडा स्थित गोमत ताल (फुलहर झील) के संरक्षण और कायाकल्प की दिशा में बड़ी पहल हुई है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने नमामि गंगे मिशन-3 के तहत 12.26 करोड़ रुपये की परियोजना को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। परियोजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।
माधोटांडा के पास स्थित गोमत ताल यानी फुलहर झील को गोमती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। यहां से निकलने वाली गोमती उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर करीब 940 से 960 किलोमीटर की यात्रा तय करने के बाद गाजीपुर जिले के सैदपुर क्षेत्र में गंगा नदी से मिलती है। ऐसे में उद्गम स्थल पर जल स्रोतों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को नदी के आगे के प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीनों झीलों का होगा पुनर्जीवन
स्वीकृत परियोजना के तहत गोमती उद्गम स्थल की तीनों झीलों का पुनर्जीवन किया जाएगा। वर्षा जल के नियंत्रित प्रवाह के लिए जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ करीब 3.23 किलोमीटर लंबे जल निकासी मार्ग की गाद निकासी, सफाई और तटबंधों की मरम्मत कराई जाएगी। जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक निर्माण कार्यों के साथ पाइप की व्यवस्था भी की जाएगी।
नदी में नहीं जाएगा बिना उपचारित गंदा पानी
माधोटांडा कस्बे से निकलने वाले घरेलू गंदे पानी को सीधे गोमती में जाने से रोकने के लिए प्राकृतिक तकनीक पर आधारित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया जाएगा। गंदे पानी को उपचार संयंत्र तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन, मैनहोल और नालियों का निर्माण व सुधार किया जाएगा। इससे जुड़े स्थानों पर सड़क की मरम्मत भी कराई जाएगी।
एसटीपी परिसर में कार्यालय, विद्युत व्यवस्था कक्ष, पार्किंग, आंतरिक सड़क, पौधरोपण, सोलर लाइट और चारदीवारी जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य उद्गम क्षेत्र के जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने, प्रदूषण पर नियंत्रण करने और बिना उपचारित घरेलू गंदे पानी को गोमती में जाने से रोकना है।
दो साल से चल रहे थे प्रयास
केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार, परियोजना की स्वीकृति के लिए वह पिछले दो वर्षों से प्रयासरत थे। उन्होंने परियोजना की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के प्रति आभार जताया।
जितिन प्रसाद ने कहा कि गोमती उद्गम स्थल पीलीभीत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। झीलों के पुनर्जीवन और जल प्रदूषण नियंत्रण से गोमती की निर्मलता और उद्गम क्षेत्र के पर्यावरणीय स्वरूप को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
परियोजना पूरी होने के बाद माधोटांडा क्षेत्र से निकलने वाले घरेलू गंदे पानी को उपचारित करने की व्यवस्था किए जाने का लक्ष्य है। स्थानीय लोगों ने भी परियोजना की स्वीकृति का स्वागत किया है। उनका कहना है कि उद्गम स्थल के जल स्रोतों के संरक्षण के साथ यहां बुनियादी सुविधाओं का विकास होने से क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा।
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